सीजेआई सूर्यकांत के एक और बयान पर बवाल: पूर्व अफसरों-वकीलों ने खोला मोर्चा, क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के एक और मौखिक बयान पर देश का कानूनी और प्रशासनिक हलका उबल पड़ा है। एक अदालती सुनवाई के दौरान की गई उनकी टिप्पणी के बाद पूर्व सिविल सेवकों, वरिष्ठ वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मामले में देश की 70 से अधिक नामचीन हस्तियों ने सीजेआई को एक खुला पत्र लिखकर गहरी नाराजगी जताई है। इस चिट्ठी ने देश की सबसे बड़ी अदालत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र लिखने वालों में देश के पूर्व आईएएस, आईपीएस अधिकारी, जाने-माने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। अब ये नया विवाद क्या है विवाद की असली वजह क्या है विवाद की मुख्य वजह है कोर्ट रूम में जजों की ओर से की जाने वाली मौखिक टिप्पणियां। अक्सर मामलों की सुनवाई के दौरान जज वकीलों से बातचीत करते हुए अपनी राय देते हैं या कुछ कड़े शब्द बोल देते हैं। पत्र लिखने वालों का कहना है कि ये बातें लिखित आदेश या अंतिम फैसले में तो शामिल नहीं होतीं, लेकिन मीडिया में तुरंत फ्लैश हो जाती हैं। इससे आम जनता के बीच ऐसा संदेश जाता है जैसे कोर्ट ने पहले ही तय कर लिया है कि कौन सही है और कौन गलत इससे निष्पक्ष न्याय की भावना को ठेस पहुंचती है। बात इतनी ज्यादा क्यों बढ़ गई यह नया विवाद बिल्कुल गलत समय पर सामने आया है। सीजेआई सूर्यकांत पहले से ही एक पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में देश के बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कहा था। हालांकि, बाद में उन्होंने सफाई भी दी। तब तक देर हो गई। युवाओं ने नया कॉकरो जनता पार्टी बना लिया। उस पुराने मामले की वजह से मुख्य न्यायाधीश की प्रशासनिक मुलाकातों पर पहले ही सवाल उठ रहे थे। लोग कह रहे थे कि सरकार और कोर्ट के बीच की दूरी कम हो रही है। इसी माहौल के बीच सीजेआई का एक और बयान सामने आ गया, जिसने आग में घी डालने का काम किया। यह भी पढ़ें:Supreme Court:आर्केस्ट्रा और स्पा में नाबालिगों के काम करने पर कोर्ट सख्त, PIL पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी सीजेआई ने अब क्या कहा दरअसल, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि हमें भारत में एक भी ऐसी परियोजना दिखाएं जहां पर्यावरण कार्यकर्ता कहते हों, 'हम इस परियोजना का स्वागत करते हैं, देश प्रगति कर रहा है।' यह टिप्पणी लिखित आदेश का हिस्सा नहीं थी। पत्र लिखने वालों की मांग क्या है इस बयान के खिलाफ इन पूर्व अधिकारियों और वकीलों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है और जनता का इस पर अटूट भरोसा है। अगर अदालत की कुर्सी पर बैठकर ऐसी बातें कही जाएंगी जो निष्पक्ष नहीं लगतीं, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठ जाएगा। इसलिए, जजों को सुनवाई के दौरान अपनी भाषा पर बहुत संयम रखना चाहिए और बेहद सोच-समझकर बोलना चाहिए।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 26, 2026, 09:24 IST
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