कैग रिपोर्ट: कैदियों की अमानत से जेलों का खर्च, सुरक्षा कर्मी नहीं मिलने से इलाज अटका

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024 तक की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की जेलों में गंभीर खामियां उजागर की हैं। यह रिपोर्ट कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है। जेल प्रशासन ने बजट की कमी के दौरान कैदियों के निजी संपत्ति खातों का उपयोग विभागीय खर्चों के लिए किया। जांची गई जेलों में ऐसे खातों से कुल 65.89 लाख रुपये निकाले गए। मार्च 2024 तक 6.56 लाख रुपये कैदियों के खातों में वापस जमा नहीं किए गए थे। हिमाचल प्रदेश प्रिजन मैनुअल 2021 के अनुसार, कैदियों का प्रॉपर्टी अकाउंट निजी अमानत है। इसका विभागीय कार्यों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंडा, सोलन और धर्मशाला जेलों में यह राशि पुलिस सुरक्षा भत्ते और मेडिकल परीक्षण जैसे खर्चों में लगी। कंडा जेल में 4,57,878 रुपये, सोलन जेल में 1,81,380 रुपये और धर्मशाला जेल में 17,085 रुपये वापस जमा नहीं हुए थे। कैग ने इस व्यवस्था को नियमों के विपरीत माना है। विभाग ने बजट मिलने पर राशि की भरपाई का तर्क दिया। वर्ष 2021 से 2024 के बीच 16,723 कैदियों को बाहरी अस्पतालों में रेफर किया गया। इनमें से 6,731 यानी 40.25 फीसदी कैदी पुलिस सुरक्षा न मिलने से अस्पताल नहीं पहुंच सके। वर्ष 2022 में 54 फीसदी कैदियों का इलाज सुरक्षा अभाव में अटक गया। कंडा और धर्मशाला जेलों में अस्पताल सुविधाओं की कमी और बेकार पड़े मेडिकल उपकरण भी सामने आए। प्रशिक्षित ऑपरेटरों की कमी के कारण हेमेटोलॉजी एनालाइजर जैसे उपकरण उपयोग में नहीं आ सके। कैग रिपोर्ट ने जेलों में सुरक्षा स्टाफ की भारी कमी को भी रेखांकित किया है। मॉडल जेल मैनुअल के अनुसार 1,281 वार्डर और हेड वार्डर की आवश्यकता थी। अप्रैल 2024 तक केवल 466 पद भरे थे, जो कुल जरूरत का 36 फीसदी है। डिस्पेंसरों के 68 फीसदी और सहायक अधीक्षकों के 57 फीसदी पद भी रिक्त पाए गए। इस स्टाफ कमी ने जेल प्रशासन और कैदियों के अस्पताल रेफरल दोनों को प्रभावित किया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 04, 2026, 22:37 IST
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