भाजपा की टीम नवीन की सुगबुगाहट तेज:एमपी के चार चेहरों पर नजर, पीएम मोदी से वीडी शर्मा की मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के गठन की कवायद के बीच मध्य प्रदेश से भी राष्ट्रीय संगठन में जगह पाने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद विष्णुदत्त शर्मा (वीडी शर्मा) की हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हुई हैं।भाजपा के सामने राष्ट्रीय टीम में नए चेहरों को जगह देने के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती है। ऐसे में मध्यप्रदेश से ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के चेहरों को प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। संभावित नामों में वीडी शर्मा, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, सांसद गजेंद्र पटेल और वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य की चर्चा है। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा और इसमें जातीय समीकरण के अलावा संगठन में पकड़, चुनावी प्रबंधन, अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता अहम होगी। ये भी पढ़ें-MP News:मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर-मावा के निर्माण और बिक्री पर रोक, 921 में 123 पनीर सैंपल मिले अमानक पीएम से मुलाकात के बाद चर्चा तेज पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम संभावित दावेदारों में सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वे लंबे समय तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर से लेकर चुनावी प्रबंधन तक संभालने का अनुभव रखते हैं। प्रदेश में भाजपा को लगातार मजबूत करने के दौर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात ने भी उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। वीडी शर्मा के पक्ष में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक अनुभव भी जाता है। यदि भाजपा राष्ट्रीय टीम में अनुभवी और संगठन को समझने वाले नेताओं को बड़ी भूमिका देने की रणनीति अपनाती है, तो उनका नाम मजबूत दावेदारों में रह सकता है। ये भी पढ़ें-Bhopal News:बड़े तालाब में कल दिखेगी तिरंगे की छटा, सैकड़ों नावों के साथ निकलेगी नौका तिरंगा यात्रा कविता पाटीदार : महिला और ओबीसी का समीकरण राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार भी राष्ट्रीय संगठन के लिए संभावित चेहरों में हैं। प्रदेश भाजपा संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुकी पाटीदार के पास संगठन के साथ संसदीय राजनीति का अनुभव भी है। उनके नाम के साथ महिला और ओबीसी दोनों समीकरण जुड़ते हैं। भाजपा के लिए महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय टीम में किसी महिला नेता को प्रमुख जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है। वहीं ओबीसी प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम पार्टी के सामाजिक विस्तार की रणनीति में फिट बैठता है। ये भी पढ़ें-MP News:स्वतंत्रता दिवस पर 47 पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान होंगे सम्मानित, सीएम यादव करेंगे पदक अलंकरण गजेंद्र पटेल : आदिवासी चेहरे पर दांव राष्ट्रीय संगठन में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति बनी तो सांसद गजेंद्र पटेल का नाम भी महत्वपूर्ण हो सकता है। मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में संगठनात्मक और राजनीतिक काम का अनुभव रखने वाले पटेल इस वर्ग के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखे जा सकते हैं। भाजपा के लिए आदिवासी राजनीति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के साथ आसपास के राज्यों में भी आदिवासी मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में आदिवासी चेहरे को जगह देना पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ये भी पढ़ें- MP News:योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मंत्री भूरिया बोली-धरातल पर दिखना चाहिए असर लालसिंह आर्य : दलित प्रतिनिधित्व का विकल्प ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। वे भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो इससे दलित प्रतिनिधित्व का संदेश जाएगा। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दलित वोट महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में इस वर्ग के अनुभवी चेहरे को प्रमुख भूमिका देना राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से उपयोगी हो सकता है। दतिया की हार के बाद संगठनात्मक प्रदर्शन भी कसौटी प्रदेश में हालिया दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन का दौर है। ऐसे में राष्ट्रीय टीम के लिए प्रदेश से चेहरों के चयन में केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक प्रदर्शन, चुनावी प्रबंधन और नेताओं की स्वीकार्यता को भी ध्यान में रख सकता है। दतिया के नतीजे ने प्रदेश संगठन के सामने 2028 की तैयारियों को लेकर भी चुनौती बढ़ाई है। ऐसे में राष्ट्रीय जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं की उपयोगिता केवल सामाजिक समीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 12, 2026, 20:47 IST
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