Delhi NCR News: बसों की हड़ताल ने बढ़ाई यात्रियों की मुसीबत
कहीं डिपो से निकलकर रुक गईं बसें, कहीं घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली सवारी, ऑटो का किराया चार गुना तक बढ़ाज्योति सिंहनई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर बुधवार को बसें तो दिखीं, लेकिन यात्रियों का सफर आसान नहीं हुआ। डीटीसी बस चालकों की हड़ताल के बीच कई बसें डिपो से निकलीं, मगर यात्रियों को बैठाए बिना आगे बढ़ गईं या कुछ दूरी पर खड़ी हो गईं। बस स्टैंड पर लोग घंटों इंतजार करते रहे। डिजिटल बोर्ड पर ब्रेकडाउन, नो सर्विस और ट्रायल जैसे संदेशों ने रही-सही तस्वीर भी धुंधली कर दी। नतीजा यह रहा कि दफ्तर, स्कूल और रोजमर्रा के काम पर जाने वालों को ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। सामान्य सफर की तुलना में कई यात्रियों का खर्च कई गुना बढ़ गया।अमर उजाला की शादीपुर, नारायणा, सुभाष प्लेस, पीरागढ़ी और वजीरपुर समेत कई डिपो की पड़ताल में बस संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति सामने आई। यात्रियों को यह तक स्पष्ट नहीं था कि डिपो से निकलने वाली कौन-सी बस रास्ते में सेवा देगी और कौन नहीं। शादीपुर : बस आई, लेकिन यात्री नहीं बैठा सकीशादीपुर डिपो से बसें बाहर निकलती दिखीं, लेकिन थोड़ी दूरी पर रुक गईं। यात्रियों को बैठाने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। डिपो के बाहर पुलिसकर्मी भी तैनात रहे। एक डीटीसी पुलिसकर्मी ने बस सेवा सामान्य होने और किसी तरह की हड़ताल नहीं होने की बात कही। बस स्टैंड पर यात्री हर निकलती बस की तरफ उम्मीद से देखते रहे। यात्री पूजा ने बताया कि बसें दिखाई दे रही हैं, लेकिन यह पता नहीं चल रहा कि कौन-सी बस चलेगी। देर होने के कारण उन्हें ऑटो लेना पड़ा और 400 रुपये खर्च करने पड़े। नारायणा : बसों में चालक-परिचालक, सड़क पर यात्री परेशाननारायणा डिपो के आसपास हाईवे के पास कई बसें खड़ी थीं। बसों में चालक-परिचालक मौजूद थे, लेकिन यात्रियों को लेकर नियमित संचालन नहीं हो रहा था। करीब एक घंटे इंतजार करने के बाद रोहित शर्मा को ऑटो लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि सामान्य सफर के मुकाबले चार गुना ज्यादा किराया देना पड़ा। दफ्तर पहुंचने में देरी से आधे दिन की तनख्वाह कटने की आशंका भी है। पीरागढ़ी में बस का इंतजार कर रहीं शोभा ने कहा कि कर्मचारियों और ऑपरेटर के बीच विवाद का खामियाजा यात्रियों को नहीं भुगतना चाहिए। यात्रियों को कम किराये में स्पष्ट और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन मिलना चाहिए। 862 रुपये की दिहाड़ी पर सवाल, चालकों ने गिनाईं परेशानियांहड़ताल कर रहे चालकों ने कम वेतन, लंबी ड्यूटी और सुविधाओं की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया। नारायणा डिपो के चालक अनिल कुमार ने कहा कि वर्षों से बस चलाने के बावजूद सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। सुभाष प्लेस के चालक संदीप ने सुरक्षा, मेडिकल और पीएफ सुविधा नहीं मिलने की बात कही। आलम ने कहा कि 862 रुपये की दिहाड़ी में घर चलाना मुश्किल है। बस की मेंटेनेंस, चालान और टूट-फूट के नाम पर होने वाली कटौती अलग है। गुरुमुख सिंह ने महंगाई, मकान के किराये और बच्चों की पढ़ाई के बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए कहा कि 30 दिन काम करने के बाद भी परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल है। सरकार बोली- समस्या का तत्काल समाधान करें निजी कंपनियांहड़ताल के चलते बुधवार को सड़कों पर करीब 50 प्रतिशत कम बसें चलीं। स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने चालकों से हड़ताल खत्म करने की अपील की। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि डीटीसी बसों का संचालन करने वाली निजी कंपनियों को चालकों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चालकों की समस्याएं सुनने के लिए तैयार है, लेकिन आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। चालकों की पांच प्रमुख मांगें 2000 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी और समान काम का समान वेतन। सरकारी छुट्टियों का भुगतान और वार्षिक बोनस। मेडिकल योजना और सामाजिक सुरक्षा। बस के नुकसान पर जुर्माना खत्म करने और ओवरटाइम का भुगतान। ऑपरेटर कंपनियों की कमाई के अनुरूप चालकों का वेतन बढ़ाना।स्कूली बसों को लेकर भी अभिभावकों में असमंजसहड़ताल की आंच स्कूली विद्यार्थियों तक भी पहुंची। सरदार पटेल विद्यालय ने अभिभावकों को संदेश भेजकर बताया कि कुछ क्षेत्रों में हड़ताल के कारण स्कूल बसों के संचालन की स्थिति अनिश्चित है। विद्यालय ने सेवा सामान्य होने तक अभिभावकों से संबंधित बस दीदी के संपर्क में रहने को कहा।यूनियन : सरकार का प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं आयाएकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा कि 862 रुपये में बस चलाना बंधुआ मजदूरी जैसा है। उनका कहना है कि सरकार का कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं आया, इसलिए बसें नहीं चलाने का फैसला किया गया। यूनियन के महासचिव ने आरोप लगाया कि ऑपरेटर कंपनियां करोड़ों रुपये कमा रही हैं, जबकि चालकों से जुर्माना वसूला जा रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 16, 2026, 18:10 IST
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