Bhopal News: संगीत, मायथोलॉजी और तकनीक का संगम, विश्वरंग 2025 का तीसरा और अंतिम दिन बना सांस्कृतिक पर्व

रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विश्वरंग 2025 के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत सितार वादन की शांतिमय प्रस्तुति से हुई। युवा सितार वादक अनिरुद्ध जोशी और तबला वादक मनोज पाटीदार ने मंगलाचरण में अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभागार को सुरों से भर दिया। प्रज्ञानं ब्रह्म पर विचारप्रवर्तक संबोधन पहले वैचारिक सत्र में सौरभ द्विवेदी ने सीखने, जिज्ञासा, वेदांत के तत्वमसि और मानवीय मूल्यों पर सारगर्भित चर्चा की। उन्होंने कहा कि सीखना बंद होते ही मनुष्य ठहर जाता है और जीवन का लक्ष्य सरल होना होना चाहिए। द्विवेदी ने विज्ञान, संस्कृति, संवेदना और आत्मचिंतन पर आधारित अनेक दृष्टांत प्रस्तुत किए। सान्या मल्होत्रा ने साझा किए अभिनय के गुर दोपहर के सत्र में फिल्म अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा ने अभिनय को “सतत साधना” बताते हुए किरदार को गहराई से समझने की प्रक्रिया, पटकथा अध्ययन, अभ्यास और अस्वीकृति से सीखने के अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि अभिनय में करियर से पहले शिक्षा पूरी करना अत्यंत आवश्यक है। देवदत्त पटनायक ने मायथोलॉजी की अवधारणा समझाई लेखक और माइथोलॉजिस्ट देवदत्त पटनायक ने मायथोलॉजी शब्द की जड़ों, मिथ्या की अवधारणा, आख्यानों के महत्व और जिज्ञासा की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि ज्ञान के द्वार श्रद्धा नहीं, शंका खोलती है, और माइथोलॉजी को तभी समझा जा सकता है जब उसके पीछे के तर्कों को प्रश्नों के माध्यम से परखा जाए। यह भी पढ़ें-SIR के सिर्फ 6 दिन बचे, भोपाल में अभी 42% अपलोडिंग अधर में, बीएलओ पर बढ़ा दबाव, एक और निलंबित समानांतर सत्रों में समाज, भाषा और मीडिया पर गहन चर्चा अंजनी सभागार में वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने मीडिया के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्रभाव, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और पत्रकारिता के मूल्यों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि तेज़ सूचना प्रवाह के कारण गलत सूचनाओं का खतरा बढ़ा है, इसलिए मीडिया उपभोक्ताओं को सजग रहना चाहिए। यह भी पढ़ें-एमपी में ठंड का यू-टर्न, 12 शहरों का पारा 10 डिग्री से नीचे, सुबह कोहरे से विजिबिलिटी घटी लुप्तप्राय भाषाओं पर सत्र आदिरंग सभागार में डॉ. स्नेहलता नेगी ने भारतीय भाषाओं के संकट, मौखिक परंपराओं के महत्व और भाषाओं के संरक्षण को समाज का सामूहिक दायित्व बताया। बाल कला कार्यशाला में बच्चों ने क्ले मॉडलिंग, पेंटिंग और प्रिंट मेकिंग में उत्साह के साथ भाग लिया। कलाकारों नीरज अहिरवार, महावीर वर्मा, मुकेश बिजौल, रवीन्द्र शंकर और दिव्या सिंह ने बच्चों को कला के प्रति संवेदनशील बनाया। अभिमन्यु अनंत मंच पर वैश्विक भाषा तकनीक और भारतीय भाषाओं के भविष्य पर सत्र आयोजित हुआ। अमेरिका के अशोक ओझा, डॉ. जयशंकर बाबु, आर्मेनिया की अलिना खलगायथ्याम, और पूर्व राजनयिक शिव कुमार ने डिजिटल साहित्य, भाषा डेटा और AI टूल्स के महत्व पर विचार रखे। शांतिनिकेतन में हुए सत्र में प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने अपने उपन्यास एक तानाशाह की प्रेमकथा के बहाने लेखन, सत्ता, प्रेम और मानवीय व्यवहार पर हास्यपूर्ण और गहरी टिप्पणियाँ कीं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 29, 2025, 20:23 IST
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