Bhopal: एम्स भोपाल की नई जांच से एमडीआर-टीबी के इलाज में बड़ी राहत, अब 2 दिन में पता चलेगी कौन-सी दवा असरदार

दवा-प्रतिरोधी टीबी यानी एमडीआर-टीबी के मरीजों के इलाज में सही दवा चुनना बड़ी चुनौती है। अब एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। डॉक्टरों ने जीनोटाइप एमटीबीडीआरएसएल जांच विकसित की है, जिससे मरीज में दवा प्रतिरोध का पता करीब दो दिन में लगाया जा सकेगा। पहले ऐसी जांच की रिपोर्ट आने में चार से छह सप्ताह तक लग जाते थे। इस देरी के कारण डॉक्टरों को कई बार अनुमान के आधार पर उपचार शुरू करना पड़ता था। नई जांच से कम समय में यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मरीज पर कौन-सी दवा प्रभावी रहेगी। 74 मरीजों पर किया गया अध्ययन एम्स के माइक्रोबायोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन और ट्रांसलेशनल मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने 74 एमडीआर-टीबी मरीजों पर इस जांच का परीक्षण किया। इसमें करीब 19 प्रतिशत मरीजों में फ्लोरोक्विनोलोन दवाओं के प्रति प्रतिरोध मिला। शोध में यह भी सामने आया कि दवा के असर को प्रभावित करने का एक कारण टीबी के जीवाणु में जीआर-ए जीन में बदलाव है। नई जांच ऐसे आनुवंशिक बदलावों की पहचान करने में मदद करती है। यह भी पढ़ें-यूसीसी के खिलाफ 16 से 20 अगस्त तक चलेगा अभियान: आरिफ मसूद बोले- आज मुसलमान कल दूसरे समुदाय भी होंगे प्रभावित सरकारी प्रयोगशालाओं में भी हो सकती है जांच इस तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए बहुत महंगी मशीन की जरूरत नहीं है। मरीज के कफ या अन्य नमूने से टीबी के जीवाणु का डीएनए लेकर जांच की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे सरकारी प्रयोगशालाओं में भी लागू किया जा सकता है। अध्ययन का नेतृत्व डॉ. आनंद कुमार मौर्य ने किया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी टीबी कार्यक्रम में इस जांच को शामिल करने से मरीजों को जल्द सही उपचार मिल सकता है। इससे इलाज में देरी कम करने और संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 10, 2026, 20:21 IST
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