अजाक्स में वर्चस्व की जंग तेज: लेटरहेड पर विवाद, अध्यक्ष पद को लेकर मुकेश मौर्य और संतोष वर्मा आमने-सामने
मध्यप्रदेश अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) में संगठन के नेतृत्व को लेकर विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। उज्जैन में प्रस्तावित प्रांतीय सम्मेलन और संगठन के लेटरहेड के उपयोग को लेकर दोनों गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर प्रांताध्यक्ष होने का दावा कर रहे चौधरी मुकेश मौर्य ने सम्मेलन को अनधिकृत बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स के दूसरे गुट के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा ने मौर्य की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि संगठन के बायलॉज के अनुसार आईएएस ही अध्यक्ष नहीं बन सकता। मौर्य प्राइवेट कर्मचारी हैं। दरअसल, रविवार को उज्जैन में संतोष वर्मा की अध्यक्षता में अजाक्स का प्रांतीय सम्मेलन प्रस्तावित है। सम्मेलन के लिए जारी किए गए पत्र और लेटरहेड को लेकर विवाद शुरू हो गया है। ये भी पढ़ें-शंकराचार्य सदानंद सरस्वती बोले-मंदिरों के धन पर सरकार का अधिकार नहीं,राममंदिर चोरी के दोषियों को मिले कड़ी सजा मौर्य बोले- संगठन के नाम का हो रहा दुरुपयोग चौधरी मुकेश मौर्य ने आरोप लगाया कि संगठन से किसी प्रकार का वैधानिक संबंध नहीं रखने वाले कुछ लोग अजाक्स के नाम, लेटरहेड, पदनाम और पहचान का उपयोग कर अधिकारियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतोष वर्मा, एस.एल. सूर्यवंशी, एम.सी. अहिरवार, राजवीर अग्निहोत्री, महेश विरोलिया और बसंत खरे सहित कुछ व्यक्तियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों, बैठकों और जारी किए गए पत्रों का मध्यप्रदेश अजाक्स से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जा रही है। साथ ही संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की शिकायत मध्यप्रदेश शासन और संबंधित विभाग प्रमुखों से भी की जा रही है। ये भी पढ़ें-MP:सतपुड़ा की वादियों में बसा 'कुकरू' बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन केंद्र, जानिए क्यों खास है यह हिल स्टेशन सदस्यों से अधिकृत सूचना पर ही भरोसा करने की अपील मौर्य ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों से अपील की कि वे केवल संगठन के अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा जारी सूचना और कार्यक्रमों को ही मान्यता दें तथा किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं। उन्होंने कहा कि संगठन की गरिमा और वैधानिकता बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। ये भी पढ़ें-Bhopal News:भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, 27 करोड़ रुपये की जमीन से हटाए गए अवैध निर्माण संतोष वर्मा ने उठाए अध्यक्ष पद पर सवाल वहीं, संतोष वर्मा ने मुकेश मौर्य के अध्यक्ष होने पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि अजाक्स के बायलॉज के अनुसार संगठन का अध्यक्ष केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी ही हो सकता है। ऐसे में मुकेश मौर्य, जो सरकारी सेवा में नहीं हैं, अध्यक्ष नहीं बन सकते। वर्मा ने दावा किया कि 23 नवंबर 2025 तक जे.एन. कंसोटिया संगठन के अध्यक्ष थे। इसके बाद विधिवत प्रक्रिया के तहत उन्हें अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने कहा कि यदि कंसोटिया 2025 तक अध्यक्ष रहे, तो मुकेश मौर्य का 2023 से अध्यक्ष होने का दावा स्वतः ही सवालों के घेरे में आ जाता है। ये भी पढ़ें-MP News:बैतूल के हिल स्टेशन कुकरू में कल रात्रि चौपाल लगाएंगे मुख्यमंत्री यादव, ग्रामीणों से करेंगे सीधा संवाद बायलॉज का भी दिया हवाला संतोष वर्मा ने कहा कि 1991 में गठित अजाक्स के पहले अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह थे। उनके बाद एम.एम. दाहिमा और फिर जे.एन. कंसोटिया अध्यक्ष बने। उन्होंने दावा किया कि संगठन के संविधान और बायलॉज के अनुरूप ही 23 नवंबर 2025 को उन्हें अध्यक्ष चुना गया है। अब दोनों गुटों के दावों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अजाक्स में नेतृत्व को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 27, 2026, 18:48 IST
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