आईफोन 18 प्रो की लॉन्चिंग: भारत के स्मार्टफोन बाजार में महज 9% हिस्सेदारी, फिर एपल की कमाई सबसे ज्यादा कैसे?
एपल स्मार्टफोन को पसंद करने वाले लोगों के लिए आज का दिन खास होने वाला है। कंपनी आईफोन 18 प्रोलॉन्च करने जा रहीहै। इस बार का लॉन्च इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह एपल के नए सीईओ जॉन टर्नस के कार्यकाल का पहला बड़ा आईफोन लॉन्च है। अक्सर लोगों का यह सवाल रहता है कि देश में एपल कम स्मार्टफोन बेचकर भी ज्यादा कमाई कैसे करताहै एपल कम फोन बेचकर ज्यादा कमाई कैसे करता है भारत में सबसे ज्यादा स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनी में एपल का नाम शुमार नहीं है। एक रिपोर्ट की मानें तो 2026 की पहली तिमाही में वीवो 19.6 प्रतिशत यूनिट शेयर के साथ नंबर 1, सैमसंग 17.1 प्रतिशत के साथ नंबर 2, ओप्पो 15.3 प्रतिशत के साथ तीसरे और एपल करीब 9.4 प्रतिशत शेयर के साथ चौथे नंबर पर था। इस रिपोर्ट की मानें तो भारत में अगर 100 स्मार्टफोन बिकते हैं, तो उसमें से 9.4 स्मार्टफोन एपल के होते हैं। वहीं आपको कहानी के दूसरे हिस्से को समझना भी काफी जरूरी है। उन्हीं 100 फोन से होने वाली कुल बिक्री की कमाई में एपल की हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत है। यानी बाजार में बिकने वाले हर 100 रुपये के स्मार्टफोन में करीब 28 रुपये एपल के खाते में जाते हैं। आईफोनसिर्फ शुरुआत है, असली खेल सर्विसेसका है एपल का लक्ष्य हर जेब तक पहुंचना नहीं है।वह कम फोन बेचकर भी दूसरी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से ज्यादा पैसे कमाने की रणनीति पर चलता है। एपल कीअसली कमाई का खेल सिर्फ आईफोन बेचने तक सीमित नहीं है। असली कहानी उस समय शुरू होती है जब कोई व्यक्ति एक बार आईफोन खरीदने के बाद भी एपल को पैसे देना जारी रखता है। ये एपल के सर्विस बिजनेस कीबड़ी ताकत है। मान लीजिए कोई व्यक्ति आईफोन खरीदता है, लेकिन उसके बाद एपल के साथ उसका रिश्ता खत्म नहीं होता। वह अपनी तस्वीरें और फाइलें आईक्लाउड पर रखने के लिए भुगतान कर सकता है। गाने सुनने के लिए एपल म्यूजिक, फिल्में और सीरीज देखने के लिए एपल टीवी का सब्सक्रिप्शन खरीद सकता है। यानी एक आईफोन की बिक्री से शुरू हुआ रिश्ता आगे चलकर बार-बार होने वाली कमाई में बदल जाता है। यही अंतर एपल के बिजनेस मॉडल को दूसरे स्मार्टफोन निर्माताओं से अलग बनाता है। एक फोन बेचने पर कंपनी को मुख्य रूप से उसकी बिक्री से कमाई होती है। वहीं सर्विसेस में ग्राहक अगर हर महीने या हर साल भुगतान करता है, तो एक ग्राहक से मिलने वाली कमाई लगातार चलती रहती है। एपल फोन नहीं पूरा इकोसिस्टम बेचता है इसके बाद आते हैं आईफोन प्रो और प्रो मैक्स जैसे महंगे मॉडल का फायदा। इनकी कीमत ज्यादा होने के कारण प्रत्येक बिक्री एपल की कमाई में बड़ा योगदान देती है। कंपनी ने ऐसा प्रीमियम प्रसेप्शन बनाया है कि उसका ग्राहक केवल प्रोडक्ट नहीं खरीदता बल्कि डिजाइन, इकोसिस्टम, स्टेटस औरयूजर एक्सपीरियंस के लिए भी पैसा देने के लिए तैयार रहता है। आईफोन, एपल वॉच, एयरपोड्स, आईपैड, मैक जैसे डिवाइस एक दूसरे से जुड़े होते हैं। जब कोई ग्राहक इस इकोसिस्टम में आता है, तो उसके लिए एपल की दूसरी सर्विसेज इस्तेमाल करना ज्यादा स्वाभाविक और आसान हो जाता है। एपल के लिए भारत सिर्फ बिक्री का बाजार नहीं है पिछले कुछ वर्षों में भारत एपल की मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रेटजी में भी महत्वपूर्ण बन गया है। कंपनी चीन पर अपना विनिर्माण कम करने के लिए भारत में उत्पादन बढ़ा रही है। इसका मतलब यह है कि भारत एपल के लिए केवल कंज्यूमर मार्केट ही नहीं, बल्कि उत्पादन और सप्लाई का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Sep 08, 2026, 18:41 IST
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