सैलरी हाइक हो या घर का रेंट: अब एआई एजेंट करेंगे मोलभाव, एंथ्रोपिक ले रही कानूनी सलाह, क्या है कंपनी का प्लान?

एआई कंपनी एंथ्रोपिक लॉ फर्माें से सलाह ले रही है, जिससे यह समझा जा सके कि ये एआई एजेंट बिना किसी कानूनी या नैतिक सीमा को तोड़े अपने इंसानी मालिकों की ओर से निष्पक्ष सौदा कैसे तय कर सकते हैं। इसमें कीमतों पर बातचीत, विवाद सुलझाना और बेहतर ऑफर हासिल करना शामिल हो सकता है। हालांकि, इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है कि अगर एआई को आपकी ओर से बातचीत करने की आजादी दी जाए, तो वाह कितनी दूर तक जा सकता है AI एजेंट आपकी जगह कैसे करेंगे मोलभाव अभी अधिकतर लोग ऑनलाइन खरीदारी के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स पर कीमतों की तुलना करते हैं और फिर खुद तय करते हैं कि कौन-सा ऑफर बेहतर है, लेकिन अब आपकी जगह एआई एजेंट इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। वे सिर्फ ऑफर की तुलना करने के बजाय दूसरे पक्ष के एआई एजेंट से सीधे बातचीत भी कर सकते हैं। जैसे मान लीजिए, अगर आप सबसे कम कीमत पर लैपटॉप खरीदना चाहते हैं, तो आपका एआई एजेंट विक्रेता के एजेंट से संपर्क कर बेहतर कीमत या दूसरी सुविधाएं हासिल करने की कोशिश कर सकता है। इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कई दूसरे क्षेत्रों में भी हो सकता है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं किराये के समझौते: मकान मालिक या प्रॉपर्टी एजेंट के एआई से किराये और शर्तों पर बातचीत। कस्टमर सर्विस: रिफंड, खराब उत्पाद या बिलिंग से जुड़े विवादों का समाधान। रोजगार अनुबंध: सैलरी, छुट्टियों और नौकरी की दूसरी शर्तों पर बेहतर प्रस्ताव हासिल करने की कोशिश। खरीदारी: कीमत, डिलीवरी और अतिरिक्त सुविधाओं को लेकर सौदेबाजी। हालांकि, ये संभावित इस्तेमाल हैं। हर तरह की बातचीत में एआई को ऐसा करने की अनुमति, सही जानकारी और उचित सीमाएं देना जरूरी हो सकता है। एंथ्रोपिक कानूनी विशेषज्ञों से क्यों ले रही सलाह एक रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक यह समझने के लिए कानूनी फर्मों से बात कर रही है कि इंसानी वकील अपने क्लाइंट्स की ओर से बातचीत करते समय निष्पक्षता और पेशेवर जिम्मेदारी कैसे बनाए रखते हैं। कंपनी यह भी विचार कर रही है कि एआई एजेंट्स को कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और किन परिस्थितियों में उन्हें अपने यूजर से मदद या सलाह मांगना चाहिए। जैसे, अगर किसी एजेंट को 50 हजार रुपये तक का लैपटॉप खरीदने की परमिशन दी गई है, तो क्या वह 48 हजार रुपये को ऑफर स्वीकार कर सकता है या क्या वह बिना पूछे कोई अतिरिक्त शर्त मान सकता है और अगर बातचीत में ऐसी स्थिति आए, जिसकी अनुमति यूजर ने स्पष्ट रूप से नहीं दी है, तो एजेंट को क्या करना चाहिए ये सवाल इसलिए जरूरी माना जा रहा हैं, क्योंकि किसी प्रस्ताव को स्वीकार करना या कानूनी समझौते पर सहमति देना केवल कीमत का फैसला नहीं होता। इसमें यूजर की पसंद, बजट और कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हो सकती हैं। एआई एजेंटों के लिए बन सकते हैं बातचीत के नियम संभव है कि जब दो एआई एजेंट आमने-सामने हों, तो दोनों के लक्ष्य अलग हो सकते हैं। खरीदार का एजेंट कम कीमत चाहता होगा, जबकि विक्रेता का एजेंट ज्यादा कीमत या अपने क्लाइंट के लिए बेहतर शर्तें हासिल करने की कोशिश करेगा। ऐसे में एंथ्रोपिक नेगोशिएशन नॉर्म्स यानी बातचीत के नियमों पर काम कर रही है। इन नियमों का मकसद यह तय करना हो सकता है कि एजेंट बातचीत के दौरान किस तरह व्यवहार करें, किन सीमाओं में रहें और कब इंसान से सलाह लें। कंपनी एजेंटों को दिए गए निर्देशों की पुष्टि करने के तरीकों पर भी विचार कर रही है। इसमें यूजर्स के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज शामिल हो सकते हैं, जिनमें साफ लिखा हो कि एजेंट क्या कर सकता है और क्या नहीं। ऐसे नियम यूजर को यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि एजेंट केवल विकल्प सुझाएगा, कीमत पर मोलभाव करेगा या किसी प्रस्ताव को स्वीकार करने तक जा सकेगा। एंथ्रोपिक के परीक्षण में क्या सामने आया सिंतबर में एंथ्रोपिक ने एक ब्लॉग पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उसने वास्तविक दुनिया जैसी परिस्थितियों में AI एजेंटों की सौदेबाजी का परीक्षण करने की जानकारी दी थी। इसमें कर्मचारियों ने एक वर्चुअल ट्रेडिंग फ्लोर पर किताबें खरीदने और बेचने के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल किया। परीक्षण में एजेंटों को अलग-अलग तरह के निर्देश दिए गए। जिन एजेंट्स को सख्त और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने को कहा गया था, उन्होंने बेहतर सौदे हासिल करने में थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, अधिक बढ़िया व्यवहार करने वाले एजेंट्स ने कभी-कभी कम पसंद की जाने वाली किताबें भी स्वीकार कर लीं, ताकि लेन-देन में शामिल सभी पक्षों को कुछ न कुछ मिल सके। AI एजेंट दूसरे एजेंट को धोखा भी दे सकते हैं बता दें कि एंथ्रोपिक अकेली कंपनी नहीं है, जिसने इस टॉपिक पर रिसर्च की है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर मिशेल वैकारो ने भी एआई के बीच 1,80,000 से ज्यादा बातचीत का अध्ययन किया। इन बातचीत में नौकरी के ऑफर और किराये के अनुबंध जैसी परिस्थितियां शामिल थीं। उनके शोध के मुताबिक, एआई एजेंट प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके दूसरे एजेंटों को प्रभावित कर सकते हैं और उनसे निजी जानकारी निकलवाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रॉम्प्ट इंजेक्शन में किसी एआई सिस्टम को ऐसे निर्देश दिए जाते हैं, जो उसके मूल निर्देशों या सुरक्षा सीमाओं से अलग दिशा में काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अगर बातचीत के दौरान कोई एजेंट दूसरे एजेंट से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करे, तो इससे यूजर की निजता और सौदे की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसलिए एआई एजेंट्स के बीच बातचीत में केवल सही कीमत हासिल करना ही जरूरी नहीं होगा। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे संवेदनशील जानकारी साझा न करें और अपने यूजर की तय सीमाओं का पालन करें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 18, 2026, 09:59 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




सैलरी हाइक हो या घर का रेंट: अब एआई एजेंट करेंगे मोलभाव, एंथ्रोपिक ले रही कानूनी सलाह, क्या है कंपनी का प्लान? #TechDiary #National #PromptInjection #AiAgents #Anthropic #SubahSamachar