Akhilesh Yadav ON BJP : अखिलेश यादव ने खेला 'PDA पाठशाला' पर बड़ा दांव,भाजपा को शिक्षा विरोधी करार दिया!
सपा अध्यक्ष ने शिक्षकों की भर्ती को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार समय पर भर्तियां नहीं कर पा रही है। इसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षकों की कमी और संसाधनों के अभाव में सरकारी स्कूल अपनी मूल भूमिका निभाने में असफल हो रहे हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा को लेकर भी भाजपा सरकार की आलोचना की। अखिलेश यादव के अनुसार, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में फीस बढ़ने से छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं में कटौती से कमजोर वर्ग के छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के बजाय सरकार केवल आंकड़ों और दावों तक सीमित रह गई है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान शिक्षा और युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने नए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय खोले, साथ ही लैपटॉप वितरण जैसी योजनाओं के जरिए छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनके मुताबिक, सपा की नीति हमेशा से शिक्षा को सशक्त बनाने की रही है। भाजपा की ओर से अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि मौजूदा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार किए हैं और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार सभी वर्गों के छात्रों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को उठाकर वे युवाओं और अभिभावकों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, शिक्षा को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी घमासान और तेज होता नजर आ रहा है। पीडीए पाठशाला के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियाँ आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी। भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है। भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नज़रिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान के ख़िलाफ़ रहते हैं और उनके संगी-साथी एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं। बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है। इसका सबसे ज़्यादा नुक़सान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा। अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है। इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गाँव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गये तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा। भाजपा चाहे कोई भी लालच दे पर इस बार कोई उसके झाँसे में नहीं आएगा, लोग 15 लाख का हिसाब लेकर इस इंतज़ार में बैठे हैं कि कब कोई भाजपाई या उनका संगी-साथी आए तो उनसे इस साल पुराने तक़ाज़े-तक़ादे-हिसाब-उधार की वसूली-पूर्ति कराई जाए। शायद यही डर है कि आजकल लोग अपने को भाजपाई बताने से कतराने लगे हैं। अगर सरकारी शिक्षा ख़त्म हो गयी तो महंगाई और बेकारी-बेरोज़गारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पायेंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस, यूनिफ़ॉर्म, किताब-कॉपी, रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-पिकनिक, फ़ंक्शन के खर्चों में ही निकल जाएगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 07, 2026, 03:39 IST
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