Maharashtra: 'दादा के बिना महाराष्ट्र की राजनीति दिशाहीन', अजित पवार के निधन पर सामना ने यूं दी श्रद्धांजलि

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार को बारामती एयरपोर्ट पर एक विमान हादसे में निधन हो गया। वे जिला परिषद चुनाव के लिए एक जनसभा को संबोधित करने बारामती जा रहे थे। उनके अचानक चले जाने से पूरे राज्य में शोक की लहर है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने गुरुवार को अपने संपादकीय में अजित पवार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अखबार ने लिखा कि दादाके बिना महाराष्ट्र की राजनीति अब कमजोर, सुस्त और दिशाहीन महसूस हो रही है। सामनाने दीभावभीनी श्रद्धांजलि सामना ने अजित पवार को एक प्रभावशाली और स्वाभाविक नेता बताया। संपादकीय के अनुसार, उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति शुरू की, लेकिन अपनी मेहनत से एक स्वतंत्र पहचान बनाई। उनकी मौत को राज्य के लिए एक बड़ा झटका बताते हुए अखबार ने लिखा कि महाराष्ट्र ने एक मजबूत और बड़े दिल वाला नेता खो दिया है। अजित पवार हमेशा जनता के बीच सक्रिय रहते थे। वे अनुशासन, समय की पाबंदी और स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते थे। वे कभी झूठे वादे नहीं करते थे और जो कहते थे, उसे पूरा करके दिखाते थे। ये भी पढ़ें:कौन संभालेगा अजित पवार की विरासत:पत्नी से भतीजे युगेंद्र तक, जानें बारामती विधानसभा सीट पर अब किसकी दावेदारी एडिटोरियल में सामना ने कहा, "आज की राजनीति में अजित पवार एक बड़ी छतरी की तरह थे, जिसके नीचे हजारों लोगों को पनाह मिली थी। जब वह छतरी गिर गई तो उन पर निर्भर लोगों का भविष्य अनिश्चित हो गया। अजित पवार सच में एक दादा थे। दादा का यह दौर बहुत जल्दी खत्म हो गया। प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे, विलासराव देशमुख और आरआर पाटिल जैसे काबिल नेता पहले ही महाराष्ट्र के राजनीतिक मंच से जा चुके हैं। ऐसा लगता है जैसे मराठी राजनीति पर किसी बुरे जादू का असर हो गया है। एक बार फिर, महाराष्ट्र ने एक काबिल और ताकतवर नेता खो दिया है।" छह बार रहे हैं उपमुख्यमंत्री अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के राहुरी में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूध संघों, सहकारी समितियों और चीनी मिलों के प्रबंधन से की थी। साल 1991 में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए वह सीट छोड़ दी। इसके बाद वे कई बार विधायक और मंत्री रहे। उनके नाम महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा छह बार उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जैसे अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया। ये भीपढ़ें:अजित पवार का विमान हादसे में निधन: कब, कहां, क्यों और कैसे हुई दुर्घटना; अब आगे क्या इन्फोग्राफिक्स में देखें राजनीतिक सफर में आए कई बड़े बदलाव इस दौरान उनकी राजनीतिक सफर में कई बड़े बदलाव आए। नवंबर 2019 में उन्होंने एनसीपी से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बनाई थी। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने उनके गुट को ही असली एनसीपी माना और पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न उन्हें सौंप दिया। सामना ने उनकी तुलना प्रमोद महाजन, विलासराव देशमुख और गोपीनाथ मुंडे जैसे दिग्गज नेताओं से की। अखबार ने कहा कि अजित पवार एक बड़ी छतरी की तरह थे, जिसके नीचे हजारों कार्यकर्ताओं को सहारा मिलता था। उनके जाने से उनके समर्थक अब खुद को अनाथ महसूस कर रहे हैं। उनके परिवार में पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटे जय और पार्थ पवार हैं। अन्य वीडियो-

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 29, 2026, 09:36 IST
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