एआई बबल: क्या 1990 के दशक जैसा डॉट-कॉम बबल दोहराने जा रहा है इतिहास? जानिए क्या है आईएमएफ की चेतावनी
आज के समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र को बदल रहा है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां और निवेशक इस तकनीक को भविष्य की बड़ी ताकत मानते हुए इसमें भारी निवेश कर रही हैं। हालांकि, एआई में लगातार बढ़ता यह निवेश अब एक नए खतरे की ओर भी इशारा कर रहा है, जिसे एआई बबल कहा जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एआई से जुड़े सिस्टम बनाने और उन्हें चलाने में कंपनियों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। वहीं इस तकनीक से जुड़े व्यावसायिक मुनाफे और वास्तविक उत्पादकता को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अगर एआई से जुड़ी कंपनियां निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक कमाई नहीं कर पाती हैं, तो उनके शेयरो की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दुनियाभर के वित्तीय बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़े स्तर पर पड़ सकता है। इसी खतरे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने चिंता जताई है। आईएमएफ ने अपनी ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने एआई से जुड़े निवेश के जोखिमों को सामने रखा है। रिपोर्ट में आगह किया गया है कि अगर एआई को लेकर बाजार में बनी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में एआई सेक्टर में निवेश से जुड़े कई बड़े जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के मुताबिक एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। वहीं उनकी कमाई इन ऊंची उम्मीदों को पूरा कर पाएगी या नहीं इसे लेकर अभी भी सवाल है। ऐसे में अगर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है, तो बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई कारोबार में कर्ज लेकर निवेश करने का चलन और कंपनियों के बीच एक-दूसरे को वित्तीय मदद देने की व्यवस्था जोखिम को बढ़ा सकती है। इसे सर्कुलर फाइनेंसिंग कहा जाता है। इस तरह के लेनदेन से कंपनियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो सकता है। अगर एआई से होने वाली कमाई उम्मीद से कम रहती है, तो निवेशक तेजी से अपने शेयर बेच सकते हैं। इससे कीमतों में गिरावट और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसका असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। डॉट कॉम बबल आईएमएफ ने एआई में तेजी से बढ़ते निवेश की तुलना 1990 के दशक के डॉट-कॉम बबल से की है। आपको बता दें कि इंटरनेट के इस शुरुआती दौर में जो कंपनियां इंटरनेट से जुड़ी थीं उनको लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह था। उस दौरान कई कंपनियो ने अपनी कमाई के दम पर ऊंची वैल्यूएशन को सही साबित नहीं कर पाई थीं। अब एआई के क्षेत्र में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 14, 2026, 19:14 IST
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