एआई एक नशे जैसा है: आसान जवाबों की लत कहीं युवाओं से संघर्ष की सीख तो नहीं छीन रही; उठ रहे गंभीर सवाल
कबाला, यहूदी धर्म की रहस्यमयी परंपरा, ईश्वर और ब्रह्मांड के छिपे स्वरूप को समझाने का प्रयास करती है। मान्यता है कि इसे 40 वर्ष की उम्र के बाद ही पढ़ना चाहिए, क्योंकि तब तक व्यक्ति में इतनी मानसिक परिपक्वता आ जाती है कि वह इसके गहरे अनुभवों को समझ सके। शायद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संदर्भ में भी कुछ ऐसा ही सोचने की जरूरत है। एआई हमारी जिंदगी के लगभग हर हिस्से में पहुंच चुका है। लेकिन, असली सवाल यह है कि क्या हर शक्तिशाली तकनीक उपलब्ध होते ही विकसित हो रहे दिमाग के हाथों में सौंप दी जानी चाहिए जिस ग्रेजुएट प्रोग्राम में मैं ब्रांड स्ट्रैटेजी पढ़ाती हूं, वहां छात्रों ने हाल ही में थीसिस प्रोजेक्ट पूरे किए। सत्र की शुरुआत में हमने उनसे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए, जिसमें एआई के इस्तेमाल से जुड़े नियम स्पष्ट थे। उन्हें शोध करने और अपने विचारों को व्यवस्थित करने के लिए एआई इस्तेमाल करने की अनुमति थी, पर मौलिक सोच व लेखन के लिए नहीं। दरअसल, थीसिस के दौरान ही छात्रों की सोच आकार लेती है और खुलकर सामने आती है तथा उन्हें भाषा, प्रमाण, संदेह व तर्क गढ़ने की चुनौती से गुजरना पड़ता है। फिर भी, हमें संदेह था कि कुछ छात्रों ने मौलिक लेखन की जगह एआई का सहारा लिया है। जब उनसे पूछा गया, तो पहले वे झिझके, फिर स्वीकार किया कि उन्होंने एआई का उपयोग किया था। मुझे उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द ऑगमेंट सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला लगा। यह शब्द एआई के दखल को मामूली और सतही बना देता है, जबकि हकीकत में वह सिर्फ भाषा नहीं बदल रहा था, बल्कि उस संघर्ष, रचनात्मकता और जवाबदेही से भी छात्रों का रिश्ता बदल रहा था, जो सीखने की असली प्रक्रिया का आधार है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि छात्र अपने विचार गढ़ने के बजाय एआई के तैयार शब्दों पर निर्भर होकर सही अभिव्यक्ति खोजने के संघर्ष से बचने लगते हैं। वे कठिन सवालों और उलझनों का सामना करने के बजाय जल्दी जवाब ढूंढ लेते हैं। इसलिए, संघर्ष से मिलने वाली वह सीख छूट जाती है, जो किसी और तरीके से शायद कभी नहीं मिलती। वास्तव में, एआई का आकर्षण किसी नशे जैसा है। जो छात्र बहुत जल्दी एआई पर निर्भर हो जाते हैं, वे शायद ही कभी अपनी उलझन के साथ इतना समय बिताएं कि समझ सकें कि उलझन और असफलता एक ही चीज नहीं हैं। असल में, उलझन वही जरूरी अवस्था है, जहां इन्सान खुद सोचना सीखता है। सोचने का काम कोई दूसरा व्यक्ति हमारे लिए नहीं कर सकता। मेरा मानना है कि एक परिपक्व और समझदार व्यक्ति के लिए एआई बेहद उपयोगी साधन हो सकता है। जिसकी सोच विकसित हो चुकी हो, वह मशीन से सवाल कर सकता है, उसकी बनावटी चमक-दमक को पहचानकर खारिज कर सकता है और समझ सकता है कि कब मशीनी भाषा जरूरत से ज्यादा चमकदार, सपाट या भावहीन हो गई है। वह तुरंत पहचान लेता है कि कोई वाक्य बिना मेहनत के गढ़ा गया है। एक अपरिपक्व व्यक्ति शायद ही यह अंतर समझ पाए। ऐसे में, जोखिम यह है कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से युवा अपनी बुद्धिमत्ता को निखारने का अवसर खो देते हैं। बेशक, एआई के इस्तेमाल के लिए 40 वर्ष की उम्र तय करना व्यावहारिक नहीं होगा। मैं यह भी जानती हूं कि एआई को किसी अपील से भी नहीं रोका जा सकता है, क्योंकि यह तकनीक पहले ही उन प्रणालियों का हिस्सा बन चुकी है, जिनमें हम पढ़ते, सीखते और काम करते हैं। पर, किसी विचार का लागू न हो पाना, उसे महत्वहीन नहीं बना देता। कई बार किसी नियम की अहमियत उसे सख्ती से लागू करने में नहीं होती, बल्कि इस बात में होती है कि वह समाज के सबसे महत्वपूर्ण मूल्यों को सामने लाता है। कबाला भी यही संदेश देता है कि कुछ तरह का ज्ञान समय से पहले मिल जाना हमेशा बेहतर नहीं होता। कबाला सिखाता है कि किसी चीज की गहराई तक पहुंचने के लिए तैयारी जरूरी है। आज हमें भी वैसी ही सावधानी बरतने की जरूरत है। वजह यह नहीं कि एआई कोई रहस्यमयी शक्ति है, बल्कि इसलिए कि वह हम तक भाषा के माध्यम से पहुंचती है और भाषा ही वह जरूरी साधन है, जिसके जरिये हम खुद को समझते हैं, अपनी पहचान गढ़ते हैं और अपनी सोच को आकार देते हैं। म्यूज कोड यह सिर्फ कोड लिखने वाला एआई नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्मार्ट सहायक है, जो सॉफ्टवेयर बनाने की पूरी प्रक्रिया में मदद कर सकता है। यह डेवलपर के निर्देशों को समझकर कोड लिखता है, उसमें मौजूद गलतियों (बग्स) को ढूंढकर ठीक करता है, कोड की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर सकता है। यह एक साथ कई एजेंट का उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, एक एजेंट बैकग्राउंड में कोड लिखता है और दूसरा उसे रिव्यू या टेस्ट करता है। अगर किसी कारण से काम बीच में रुक जाए, तो यह वहीं से दोबारा काम शुरू कर सकता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 08, 2026, 05:25 IST
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