Hisar News: पुश्तैनी खेती छोड़ी, गैनोडर्मा से बोया उज्ज्वल भविष्य

हिसार। नेशनल स्टार्टअप डे के अवसर पर जब देश नवाचार, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का उत्सव मना रहा है, तब हरियाणा के प्रगतिशील किसान वीरेंद्र बाजवान की सफलता कहानी यह साबित करती है कि स्टार्टअप केवल शहरों और कॉरपोरेट दफ्तरों तक सीमित नहीं हैं। खेतों और पहाड़ों से भी वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है।पुश्तैनी खेती की पारंपरिक राह छोड़कर वीरेंद्र बाजवान ने मोरनी हिल्स की वादियों में औषधीय मशरूम गैनोडर्मा की खेती को अपनाया और खेती को विज्ञान, अनुसंधान व बाजार से जोड़ते हुए एक सफल एग्री-स्टार्टअप मॉडल खड़ा किया। आज उनकी यह पहल देशभर के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।वीरेंद्र बाजवान बताते हैं कि वे गोहाना की मिट्टी में जन्मे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पास पारंपरिक खेती थी, जहां आम सोच यही थी कि जितना उत्पादन होगा, उतना ही बिकेगा। लेकिन उनके मन में हमेशा यह सवाल रहा कि क्या खेती सिर्फ गुजारे का साधन है या इससे कुछ बड़ा भी किया जा सकता है। यही सोच उन्हें इस मुकाम तक ले आई।-------------खेती में कुछ हटकर करने का लिया फैसलावीरेंद्र बाजवान ने बताया कि जब उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर मेडिसिनल मशरूम गैनोडर्मा की खेती शुरू करने का निर्णय लिया, तो यह राह आसान नहीं थी। लोगों ने इसे जोखिम भरा बताया और कहा कि इसका कोई बाजार नहीं है। लेकिन उन्होंने तय कर लिया था कि यदि खेती करनी है तो उसे विज्ञान, प्रशिक्षण और मार्केटिंग से जोड़कर ही किया जाएगा। इसी सोच के तहत उन्होंने मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन से प्रशिक्षण लिया और मोरनी हिल्स के गांव बड़ियाल में छोटे स्तर पर प्रयोग शुरू किए। शुरुआती दौर में कई बार फसल खराब हुई और प्रयोग असफल भी रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।-------------एबिक से मिला मार्गदर्शन, स्टार्टअप को मिली नई दिशागैनोडर्मा और शीटाके जैसी उच्च मूल्य वाली मशरूम प्रजातियों पर लगातार शोध करते हुए उन्होंने समझा कि केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन ही सफलता की असली कुंजी है। उनके प्रयासों को नई दिशा तब मिली जब हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के एबिक सेंटर के स्टार्टअप कार्यक्रम सफल योजना के तहत उन्हें 15 लाख रुपये का अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन मिला। इसके बाद उन्होंने खेती को केवल कृषि कार्य न मानकर एक संगठित एग्री-स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।-------------घर, कमरे और छत तक पहुंची खेतीआज वीरेंद्र बाजवान वर्टिकल सिस्टम और नियंत्रित तकनीक के माध्यम से मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि खेती सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं, बल्कि घरों, कमरों और छतों पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। इस सफर में उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। पत्नी दर्शन देवी, बेटा हरिज्ञान और इंजीनियर बेटी स्वाति के साथ मिलकर वे एक “मशरूम फैमिली” के रूप में कार्य कर रहे हैं।-------------न्यूट्रास्यूटिकल कंपनी की स्थापनापरिवार के सहयोग से उन्होंने “वीएमडब्ल्यू न्यूट्रास्यूटिकल (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड” की स्थापना की। इसके तहत गैनोडर्मा, शीटाके और कीड़ा जड़ी से पूरी तरह हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान में गैनोडर्मा कॉफी सहित 20 से अधिक वैल्यू एडेड उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं।-------------सम्मान और प्रेरणावीरेंद्र बाजवान को मुख्यमंत्री से लेकर विश्वविद्यालयों तक कई सम्मान मिल चुके हैं। उनका कहना है कि असली पुरस्कार तब मिलता है, जब कोई किसान या युवा यह कहता है कि उनकी कहानी से उसे नई राह चुनने की हिम्मत मिली। अब तक वे एक लाख से अधिक किसानों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में उनके उत्पाद 30 से अधिक देशों तक पहुंचें और भारत का नाम वैश्विक हर्बल बाजार में और मजबूत हो।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 16, 2026, 01:34 IST
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