आज का शब्द: वृत्ति और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- मुझे सन्तोष नहीं
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का सभ्द है- वृत्ति, जिसका अर्थ है- वह कार्य जिसके द्वारा जीविकानिर्वाह होता हो, रोजी, पेशा। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- मुझे सन्तोष नहीं नहीं, मुझे सन्तोष नहीं। मिथ्या मेरा घोष नहीं। वह देता जाता है ज्यों ज्यों, लोभ वृद्धि पाता है त्यों त्यों, नहीं वृत्ति-घातक मैं, उस घन का चातक मैं, जिसमें रस है रोष नहीं। नहीं, मुझे सन्तोष नहीं। पाकर वैसा देने वाला— शान्त रहे क्या लेने वाला मेरा मन न रुकेगा, उसका मन न चुकेगा, क्या वह अक्षय-कोष नहीं नहीं, मुझे सन्तोष नहीं। माँगू क्यों न उसी को अब, एक साथ पा जाऊँ सब, पूरा दानी जब हो कोर-कसर क्यों तब हो मेरा कोई दोष नहीं। नहीं, मुझे सन्तोष नहीं। हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 14, 2026, 17:12 IST
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