आज का शब्द: निस्तल और सुमित्रानंदन पंत की कविता- जीवन की चंचल सरिता में

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निस्तल, जिसका अर्थ है- जिसका तल न हो, जिसके तल की थाह न हो, गहरा, वृत्ताकार। प्रस्तुत है सुमित्रानंदन पंत की कविता- जीवन की चंचल सरिता में जीवन की चंचल सरिता में फेंकी मैंने मन की जाली, फँस गईं मनोहर भावों की मछलियाँ सुघर, भोली-भाली। मोहित हो, कुसुमित-पुलिनों से मैंने ललचा चितवन डाली, बहु रूप, रंग, रेखाओं की अभिलाषाएँ देखी-भालीं। मैंने कुछ सुखमय इच्छाएँ चुन लीं सुन्दर, शोभाशाली, औ उनके सोने-चाँदी से भर ली प्रिय प्राणों की डाली। सुनता हूँ, इस निस्तल-जल में रहती मछली मोतीवाली, पर मुझे डूबने का भय है भाती तट की चल-जल-माली। आएगी मेरे पुलिनों पर वह मोती की मछली सुन्दर, मैं लहरों के तट पर बैठा देखूँगा उसकी छबि जी भर। हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 22, 2026, 18:13 IST
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