एमपी में श्रीकृष्ण की 3 पटरानियों का कनेक्शन! जानिए रुक्मिणी, जाम्बवती और मित्रविंदा से जुड़ी ये खास जगहें

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि भले ही उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन से जुड़ी हो, लेकिन मध्य प्रदेश में भी उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंग आज तक लोक आस्था का हिस्सा बने हुए हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के तीन अलग-अलग क्षेत्रों का संबंध श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पटरानियों में शामिल रुक्मिणी, जाम्बवती और मित्रविंदा से बताया जाता है। इनमें धार का अमझेरा, रायसेन का जामगढ़ और उज्जैन प्रमुख हैं। जन्माष्टमी के मौके पर जब प्रदेशभर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है, तब इन स्थानों की कृष्ण से जुड़ी कथाएं भी चर्चा में हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धार के अमझेरा में रुक्मिणी से श्रीकृष्ण का मिलन हुआ, रायसेन के जामगढ़ में जाम्बवती से विवाह हुआ और उज्जैन की मित्रविंदा को श्रीकृष्ण स्वयंवर से अपने साथ ले गए थे। ये भी पढ़ें-मध्यप्रदेश:पहले थप्पड़ कांड से चर्चा, अब EOW की छापेमारी 11 साल बाद फिर सुर्खियों में PWD इंजी KK सिंगारे अमझेरा में रुक्मिणी से जुड़ी है कृष्ण कथा धार जिले का अमझेरा भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की कथा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां स्थित अमका-झमका मंदिर इस प्रसंग की याद दिलाता है। भागवत पुराण सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी श्रीकृष्ण को पति के रूप में स्वीकार करना चाहती थीं। हालांकि उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे विवाह की इच्छा जताई। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने योजना के तहत रुक्मिणी को अपने साथ ले लिया और बाद में दोनों का विवाह हुआ। इसी प्रसंग के कारण अमझेरा को श्रीकृष्ण की ससुराल से जोड़कर देखा जाता है। ये भी पढ़ें-जन्माष्टमी से पहले द्वारकाधीश मंदिर पहुंचे सीएम मोहन यादव, पूजा-अर्चना कर मांगा प्रदेश की खुशहाली का आशीर्वाद उज्जैन की राजकुमारी थीं मित्रविंदा श्रीकृष्ण की जिन पटरानियों का संबंध मध्य प्रदेश से बताया जाता है, उनमें उज्जैन की मित्रविंदा भी शामिल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मित्रविंदा अवंतिका यानी वर्तमान उज्जैन के राजा जयसेन की पुत्री थीं। उनके भाई विन्द और अनुविन्द थे। कथा के अनुसार, मित्रविंदा श्रीकृष्ण को अपना पति बनाना चाहती थीं, लेकिन उनके भाई उनका विवाह दुर्योधन से कराना चाहते थे। इसके लिए स्वयंवर का आयोजन किया गया। जब श्रीकृष्ण को पता चला कि मित्रविंदा की इच्छा के विरुद्ध विवाह कराया जा रहा है, तो वे उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद विन्द और अनुविन्द से युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण ने उन्हें पराजित किया। बाद में मित्रविंदा से उनका विवाह हुआ। ये भी पढ़ें-एमपी:एक्सप्रेस-वे पर हादसे रोकने का नया प्लान, कैमरों से पहले पकड़ी जाएगी ओवरस्पीड और ड्राइवर की लापरवाही रायसेन का जामगढ़ और जाम्बवती की कथा रायसेन जिले के बरेली के पास स्थित जामगढ़ की गुफा को जामवंत और उनकी पुत्री जाम्बवती की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में जामवंत का निवास था और उनकी पुत्री जाम्बवती से श्रीकृष्ण का विवाह हुआ था। इस विवाह की कहानी स्यमंतक मणि से शुरू होती है। द्वारका के सत्राजित के पास यह मणि थी। इसकी विशेषता बताई गई थी कि इससे प्रतिदिन 20 तोला सोना प्राप्त होता था। श्रीकृष्ण ने सत्राजित से मणि राजकोष में देने की बात कही, लेकिन उसने इनकार कर दिया। बाद में सत्राजित का भाई प्रसेनजित मणि लेकर जंगल गया, जहां एक शेर ने उसे मार डाला। मणि वहां से जामवंत के पास पहुंच गई। इसके बाद सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर मणि चोरी करने का आरोप लगा दिया। अपने ऊपर लगे आरोप को गलत साबित करने के लिए श्रीकृष्ण मणि की तलाश में निकले। कथा के अनुसार, उनकी खोज जामवंत तक पहुंची और दोनों के बीच युद्ध हुआ। युद्ध में जामवंत ने श्रीकृष्ण को पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि उन्हें सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह श्रीकृष्ण से कर दिया। श्रीकृष्ण ने बाद में मणि सत्राजित को लौटा दी। ये भी पढ़ें-मध्यप्रदेश:बालाघाट में बच्चों की मौत के बाद सीएमएचओ हटाए गए, डिंडौरी से डॉ. मनोज पांडेय संभालेंगे जिम्मेदारी

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 03, 2026, 19:03 IST
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