Sunjay Kapur: '80 की उम्र कोर्ट में लड़ने की नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने सोना ग्रुप विवाद में दी मध्यस्थता की सलाह
भारत के बड़े कॉर्पोरेट घरानों में संपत्ति और व्यापार पर नियंत्रण को लेकर विवाद होना आम बात हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में दो प्रमुख व्यापारिक घरानों- 'सोना ग्रुप' और 'गॉडफ्रे फिलिप्स' के पारिवारिक विवादों पर अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे पारिवारिक व्यापारिक झगड़ों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए लंबी मुकदमेबाजी के बजाय शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है। सोना ग्रुप विवाद: नियंत्रण और विरासत की लड़ाई ऑटोमोटिव सेक्टर की जानी-मानी कंपनी सोना ग्रुपके भीतर इन दिनों एक बड़ा कानूनी विवाद चल रहा है। यह विवाद 80 वर्षीय रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया सचदेवा कपूर के बीच है।रानी कपूर ने 'रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट' के गठन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि यह ट्रस्ट धोखे से बनाया गया था। धोखाधड़ी का आरोप: रानी कपूर के अनुसार, 2017 में स्ट्रोक (लकवा) आने के बाद उनकी खराब सेहत का फायदा उठाया गया। उनका आरोप है कि उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर ने प्रशासनिक काम का बहाना देकर उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और उनकी सारी संपत्ति ट्रस्ट में डाल दी। विवाद का मुख्य कारण: पिछले साल जून में संजय कपूर के निधन के बाद यह विवाद और बढ़ गया। रानी कपूर का दावा है कि इसके तुरंत बाद प्रिया कपूर ने सोना ग्रुप की मुख्य कंपनियों पर अपना नियंत्रण कर लिया है, जिससे वे बेदखल हो गई हैं और उनके पास कुछ नहीं बचा है। पोते-पोतियों का दावा: इस मामले में कुछ पोते-पोतियों की तरफ से भी दावा किया गया है कि उन्हें संपत्ति के अधिकारों से बाहर रखा गया है। वहीं, प्रिया कपूर के पक्ष का कहना है कि उन्हें बिना किसी संपत्ति के छोड़ दिया गया है। वर्तमान में संपत्ति के नियंत्रण का एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "यह उम्र लड़ने की नहीं" जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय विश्नोई की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने 80 वर्षीय रानी कपूर की उम्र का हवाला देते हुए कहा, "आप 80 साल की हैं। यह उम्र आपके मुवक्किल के लिए कोर्ट में लड़ने की नहीं है"। जजों ने दोनों पक्षों के वकीलों से कहा, "आप लोग क्यों लड़ रहे हैं एक ही बार में शुरू से अंत तक मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाएं, वरना यह सिर्फ समय की बर्बादी है"। कोर्ट ने साफ किया कि इतने लंबे विवाद से किसी का भला नहीं होगा, इसलिए इसे शांतिपूर्वक सुलझाना ही सभी के हित में है। एक अन्य मामले में राहत: मोदी परिवार का विवाद सुलझा पारिवारिक कॉर्पोरेट विवादों के बीच गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। कंपनी के पूर्व कार्यकारी निदेशक समीर मोदी और उनकी मां बीना मोदी के बीच चल रहा संपत्ति और मारपीट का विवाद अब सुलझ गया है। मई 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान समीर मोदी ने आरोप लगाया था कि उनकी मां के सुरक्षा अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी उंगली टूट गई थी। लेकिन अब दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सौरभ बनर्जी को सूचित किया गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है और समीर मोदी ने अपनी शिकायत वापस ले ली है। इसके बाद कोर्ट ने बीना मोदी और अन्य के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 27, 2026, 12:44 IST
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