Meerut News: शांतिधारा विधान में 540 अर्घ्य समर्पित किए
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पंचमेरू नंदीश्वद्वीप जिनालय में चल रहे श्री नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान के छठे दिन मुख्य वेदी के अभिषेक के उपरांत विधान स्थल पहुंचकर अभिषेक और शांतिधारा की गई। आचार्य विमर्श सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्मा का वास्तविक स्वरूप शुद्ध, बुद्ध और अविनाशी है। आत्मा का अंतिम लक्ष्य सिद्ध अवस्था को प्राप्त करना है। जहां जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो जाता है और जीव अनंत सुख, अनंत ज्ञान तथा अनंत शक्ति को प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य बाहरी भौतिक सुख-सुविधाओं में उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य को भूल गया है। आत्मकल्याण का मार्ग अपने भीतर झांकने से प्रारंभ होता है। सर्वोच्च बोली लेकर शांतिधरा करने का सौभाग्य विनोद जैन, आर्जव जैन को प्राप्त हुआ। नित्य नियम पूजन करते हुए पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय के साथ भगवान शान्तिनाथ की पूजा अर्चना की गई। 540 अर्घ्य समर्पित किए। इसका सौभाग्य विजय कुमार जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, प्रवीण जैन, सुनील जैन, अनिल जैन, राजेंद्र जैन, जीवेंद्र कुमार जैन, आयूष जैन, राकेश जैन, मनीष जैन आशीष जैन, सुभाष जैन, आदि इंद्रों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, राजीव जैन, सुशील जैन, प्रवीण जैन, अभय जैन, अनिल जैन, सुनील जैन, अतुल जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, आदि ने सहयोग किया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 01, 2026, 17:57 IST
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