World Refugee Day: तिब्बत के सामने अब भाषा व संस्कृति बचाने की चुनौती, चीन नई रणनीति पर कर रहा काम

आजादी के लिए पिछले छह दशकों से जारी संघर्ष के बीच तिब्बत शरणार्थियों के सामने अब अपनी भाषा और संस्कृति बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। चीन ने तिब्बत में शिक्षण संस्थान तोड़ने के बाद अपने प्रयास तेज कर दिए हैं, जिससे तिब्बत में भाषायी व सांस्कृतिक पहचान को ही मिटा दिया जाए। चीन इस नई रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें तिब्बत की नई पीढ़ी आजादी की बात करना ही छोड़ देगी। हालांकि चीन की इस नीति के खिलाफ अब तिब्बतियों का प्रयास है कि चीन से भी ज्यादा तेजी से वे अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रयास करेंगे, ताकि तिब्बत की आजादी का संघर्ष अपने अंजाम तक पहुंच सके। करीब छह दशक पहले चीन की ज्यादतियों ने तिब्बतियों को अपनी मातृभूमि छोड़ धर्मशाला समेत दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों में शरण लेने को मजबूर कर दिया था। विशाल हिमालय को लांघ भारत पहुंचे तिब्बतियों की उस पीढ़ी के लोगों के जहन में तिब्बत की यादें आज भी ताजा हैं। वहीं, उसके बाद की पीढ़ियां कल्पनाओं में अपने देश तिब्बत को जिंदा रखे हुए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 20, 2022, 06:47 IST
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