व्हाट्सएप को यूजर घटने का डर नहीं, यही एकाधिकार

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने व्हाट्सएप की नई नीति पर सुनवाई के दौरान कहा, भारत में कोई मजबूत प्रतिद्वंद्वी न होने से व्हाट्सएप यूजर्स को उनके अनुकूल विकल्प देना ही नहीं चाहता। उसे डर ही नहीं कि यूजर्स घट जाएंगे। यही एकाधिकार का नुकसान है। आयोग ने कहा, यूजर्स किसी और प्लेटफॉर्म को चुनते हैं तो व्हाट्सएप से अपना पुराना डाटा निकालना और दूसरा विकल्प चुनने का बेहद लंबा और थका देने वाला काम होगा, जिसका फायदा प्लेटफॉर्म उठा रहा है। आयोग ने नई नीति की परतों का खुलासा करती अखबार में प्रकाशित खबरों का 19 जनवरी को खुद संज्ञान लिया। कैलिफोर्निया स्थित कंपनियों व्हाट्सएप व फेसबुक को प्रतिवादी बनाया गया। सुनवाई में पूछे सवाल पर फेसबुक ने कहा, हालांकि व्हाट्एप उसकी कंपनी है, लेकिन उसका काम अलग है, इसलिए उसे केस से अलग रखा जाए। आयोग ने कहा, जवाब कपटभरा है। व्हाट्सएप की नई नीति से उसे सीधे फायदा होने जा रहा है, लेकिन वह अज्ञानी होने का ढोंग कर रहा है। उसे केस से अलग नहीं किया जाएगा। कारोबारी प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चिंताजनक है नई नीति आयोग ने कहा कि व्हाट्सएप की नीति साफ नहीं बताती कि फेसबुक की बाकी कंपनियों से डाटा किस प्रकार साझा किया जाएगा। एक उद्देश्य सामने आता है कि इससे यूजर्स को टारगेटेड विज्ञापन मिलेंगे। लेकिन यह कारोबारी प्रतिस्पर्धा की चिंता बढ़ा देता है। इससे एक ही प्लेटफॉर्म को कारोबार व उत्पादों का एकाधिकार बढ़ाने का अवसर मिल सकता है, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। इससे उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा। यह भी कानून के खिलाफ है। मामला एक नजर में व्हाट्सएप ने निजता नीति के तहत यूजर्स को धमकाना शुरू कर दिया था कि जो इसे स्वीकार नहीं करते हैं, उनका आठ फरवरी को अकाउंट बंद हो जाएगा। बाद में डेडलाइन 15 मई की गई। नीति में व्हाट्सएप ने बताया है कि वह किन परिस्थितियों में यूजर्स की जानकारियां फेसबुक और अपने बाकी प्लेटफॉर्म पर कारोबारी उपयोग में लेगा। नहीं चली व्हाट्सएप की भी व्हाट्सएप ने 25 फरवरी को जवाब में वकीलाें को प्रतिनिधि बनाने की पेशकश की, जो अस्वीकार हो गई। उसने कहा, नीति अभी लागू नहीं हुई, बल्कि 15 मई तक बढ़ाई गई है, लिहाजा एकाधिकार का आरोप और आयोग द्वारा मामले का संज्ञान लेना जल्दबाजी है। इस तर्क को आयोग ने खारिज कर दिया। कहा, डिजिटल मार्केट में भारी मात्रा में डाटा जमा कर और इसे एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर साझा करके प्रतिस्पर्धारोधी माहौल बनाया जा सकता है। यह प्रतिस्पर्धा कानून के तहत आता है। व्हाट्सएप नई निजता नीति घोषित कर चुका है। इसकी निगरानी कानून के तहत हो रही है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 25, 2021, 05:36 IST
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