Indian Railways: शताब्दी की विफलता पर टिकी तेजस की सफलता, ट्रेनों के निजीकरण में अहम रोल अदा करेगी

गंदगी, टूटे कांच, महंगे टिकट, महंगी कैटरिंग। यही शताब्दी की पहचान बनती जा रही है। यही वजह है कि शताब्दी के यात्री देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की ओर शिफ्ट होने शुरू हो गए हैं। अक्तूबर 2019 में तेजस का संचालन आईआरसीटीसी ने शुरू किया था। ट्रेन सुबह छह बजे लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के लिए रवाना होती है। ट्रेन चेयरकार है, जिसमें डायनेमिक फेयर लगता है। वहीं, यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस जंक्शन से ही दोपहर साढ़े तीन बजे दिल्ली के लिए रवाना होती है। यह भी चेयरकार है लेकिन सुविधाओं के लिहाज से शताब्दी हमेशा से यात्रियों की पहली पसंद रही है। यात्री एसोसिएशन अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि कारपोरेट ट्रेन को सफल बनाने के लिए शताब्दी की सुविधाओं को कम कर दिया गया। पहले कैटरिंग हटाई और जो खानपान सर्व किया, वह बेहद महंगा था, जबकि यही सुविधा तेजस में टिकट के साथ मुफ्त में दी गई।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 13, 2021, 15:22 IST
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