कोरोना संक्रमित लोगों ने अपनों से संपर्क साध खुद को मानसिक तकलीफ से बचाया, अध्ययन में हुआ खुलासा

कोरोना के दौरान लगी बंदिशें कई लोगों के लिए मानसिक तकलीफ का कारण बनी तो कुछ ने बखूबी इससे अपना बचाव किया। यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट एमिलि क्रोस्का बताती हैं कि कैसे कुछ लोगों ने अपनों से संपर्क में रहकर महामारी में खुद को तनाव और अवसाद में आने से बचाया है। अमेरिकी लोगों पर हुए अध्ययन में पता चला है कि जो लोग महामारी के दौरान अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए, दुखी रहे, अकेलापन डर और भय हावी रहा उन्हें कई तरह की मानसिक परेशानी हुई। वहीं, जो लोग इस दौर के बीच भी अपने दोस्तों, परिवार के लोगों से फोन के जरिए संपर्क में रहे उनमें तनाव और अवसाद का स्तर कम था। क्रोस्का बताती हैं कि इस अध्ययन से ये साबितहुआ है कि कठिन परिस्थिति में अगर अपनों के साथ संपर्क में रहा जाए तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। भावनाओं का अधिक महत्त्व होता है क्रोस्का के अनुसार, किसी व्यक्ति के विचार और भावनाएं उसकी ताकत होती है। अगर व्यक्ति ये सोचे कि ऐसा कुछ नहीं होगा जैसा सब सोच रहे हैं। हर स्थिति में बेहतर रहने का विचार रहेगा तो व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होता है। किसी बात को लेकर तनाव में आने से अच्छा है कि उससे निकलने के उपायों पर विचार करें। सकारात्मक सोच कई तरह की समस्याओं से निकलने में मदद करती है। 485 वयस्कों पर हुआ अध्ययन वैज्ञानिकों ने इस नतीजे तक पहुंचने के लिए 485 वयस्क लोगों पर अध्ययन कर उनका व्यक्तिगत अनुभव जाना। इसमें पता चला कि कुछ लोगों ने महसूस किया है कि महामारी के डर से उन्हें पसीना आने के साथ दिल की धड़कन भी बढ़ी हुई थी क्योंकि वो खुद की सुरक्षा को लेकर बेहदचिंतित थे। अधिकतर लोग इस बात को लेकर परेशान थे कि अगर वे संक्रमित हुए तो उनका इलाज कैसे होगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 18, 2020, 06:23 IST
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