तस्करी पर रोक लगी तो आसमान छूने लगा लाल बालू का दाम

बलिया। लाल बालू की तस्करी पर अंकुश लगने के कारण जिले में लाल बालू का भाव आसमान छूने लगा है। इसके चलते लोगों को घर आदि बनवाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आमलोगों को लाल बालू ले आने को लेकर प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं होती है जबकि तस्कर आसानी से बालू ले आते हैं।जिले के प्रांतीय सीमावर्ती इलाकों से लाल बालू की तस्करी होती है। खासकर नरही थाना का भरौली गंगा पुल व बैरिया के मांझी घाट पर स्थित जयप्रभा सेतु के रास्ते यह धंधा होता है। बिहार के कोईलवर में लाल बालू का सबसे बड़ा खदान होने के कारण अधिकांश तस्करी भरौली गंगा पुल के रास्ते होती है क्योंकि कोईलवर से यूपी तक पहुंचने का यह सबसे नजदीकी रास्ता है। इसके अलावा गंगा नदी के रास्ते में कई जगहों पर बालू की तस्करी यूपी में लाया जाता है। हालांकि काफी हो हल्ला मचने के बाद करीब एक माह से तस्करी पर कुछ हद तक लगाम लगा है। इसके चलते जनपद में लाल बालू का भाव भी आसमान छूने लगा है। खास बात यह है कि इन रास्तों से आमलोग अगर ट्रैक्टर का किसी अन्य साधन से लाल बालू लाने का प्रयास करते हैं तो पुलिस उनके बालू का जब्त करती है लेकिन तस्करों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। आलम यह है कि जिले के लोग पूरी तरह तस्करी के बालू पर निर्भर हैं। लाल बालू की आवक कम होने के कारण इन दिनों बाजारों मे 80 से 100 रुपये घन फुट बालू बिक रहा है जबकि यह बालू एक माह पहले तक 40 से 50 रुपये घन फुट था। इतना ही नहीं जो बालू बाजारों में बिक रहा है वह भी या तो पूर्व में तस्करी करके डंप किया हुआ है या फिर किसी न किसी रास्ते बिहार से लाया जा रहा है। महंगाई के चलते आमलोगों को घर बनवाना मुश्किल हो रहा है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 01, 2020, 21:54 IST
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