प्रगतिशील टैक्स ढांचे को नया बल, आईएमएफ ने भी कहा- धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाओ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने एक असाधारण अपील की है। उसने दुनिया भर के देशों को अपनी धनी आबादी पर टैक्स बढ़ाने और आर्थिक गैर-बराबरी पर काबू पाने का सुझाव दिया है। आईएमएफ को आम तौर पर विकासशील देशों पर ढांचागत समायोजन की नीतियां थोपने के लिए जाना जाता है। उसे अमेरिकी पूंजी के हितों की रक्षक एजेंसी समझा जाता है। इसलिए उसकी ताजा अपील का मतलब यह समझा गया है कि दुनिया में आर्थिक गैर-बराबरी सचमुच खतरनाक सीमा तक बढ़ गई है। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि अगर कर ढांचे को न्याय पूर्ण नहीं बनाया गया, तो सामाजिक अशांति भड़क सकती है। इसलिए उसने कहा है कि अब जरूरत निम्न और मध्य आय वर्ग के लोगों पर कर्ज का बोझ घटाने और उसकी भरपाई धनी लोगों पर टैक्स बढ़ा कर करने की है। आईएमएफ ने कहा कि यह सरकारों का दायित्व है कि वे सामाजिक स्थिरता बनाए रखें, जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है। आईएमएफ दुनिया भर के देशों को कर्ज उपलब्ध कराता है। पिछले एक साल में उसने विकासशील देशों को अरबों डॉलर के कर्ज मुहैया कराया है। अब एक ताजा बयान में उसने कहा कि कोरोना महामारी के कारण डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ गया है। इसका बुरा असर तकनीकी रूप से अकुशल कर्मियों पर पड़ेगा। इस वजह से बेरोजगारी की दर बढ़ेगी। बयान में कहा गया- इस पृष्ठभूमि के कारण अलग- अलग समाजों में ध्रुवीकरण बढ़ने, सरकार के प्रति भरोसा घटने और सामाजिक अशांति की प्रवृत्तियां पैदा हो सकती हैं। इन पहलुओं ने स्वस्थ आर्थिक नीति बनाने के कार्य को अधिक जटिल कर दिया है। इनकी वजह से आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका और यूरोप में हुए हाल के जनमत सर्वेक्षणों में धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने के सुझाव के लिए समर्थन में भारी इजाफा हुआ है। लोगों की तरफ से स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की मांग तेजी से उठ रही है। साथ ही मजदूरों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी और सामजिक सुरक्षा के तंत्र को मजबूत करने की मांगों के लिए भी जनसमर्थन बढ़ा है। इसका असर विभिन्न देशों में हाल में उठाए गए कदमों पर साफ दिखा है। अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक दिन पहले ही दो ट्रिलियन डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का एलान किया। साथ ही उन्होंने धनी तबकों पर टैक्स बढ़ाने का इरादा भी जताया है। उधर न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री जेसिंडा ऑर्डेन ने न्यूनतम वेतन और धनी लोगों पर टैक्स में बढ़ोतरी का एलान किया है। अब न्यूजीलैंड में न्यूनतम वेतन 20 डॉलर प्रति घंटे होगा। न्यूजीलैंड सरकार का अनुमान है कि इससे दश के लगभग दो लाख लोगों की आमदनी बढ़ेगी। नतीजतन, साल भर में 20 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम अर्थव्यवस्था में जाएगी। साथ ही सरकार ने जिन लोगों की आमदनी एक लाख 80 हजार डॉलर से ज्यादा है, उनके लिए इनकम टैक्स की दर बढ़ा कर 39 फीसदी कर दी है। यहां तक कि धुर दक्षिणपंथी समझी जाने वाली ब्रिटेन की बोरिस जॉनसन सरकार ने भी निजी और इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स की दरों में इजाफे की योजना घोषित की है। आईएमएफ ने अब कहा है कि अगर सरकारों ने पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन करते हुए बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने की मांगें पूरी कीं, तो सरकारों में भरोसा बढ़ेगा। इस वक्त सीमित संसाधनों के बीच प्राथमिकता तय करने की जरूरत है। ध्यान उन लोगों की सहायता पर होना चाहिए, जिन पर कोरोना महामारी संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। आईएमएफ ने सुझाव दिया है कि इस बीच सरकारों को मध्य अवधि के लिए बुनियादी सेवाएं उपलब्ध करने और लोगों की आमदनी में अचानक गिरावट से पैदा होने वाली समस्याओं के लिए तैयारी करने पर ध्यान देना चाहिए। आईएमएफ ने चेतावनी दी है- अगर सरकारें इस चुनौती का सामना करने में अक्षम रहीं, तो समाज में बंटवारा बढ़ सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2021, 15:03 IST
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