जुबां पर आया दर्द: चंपावत के रण में उतरीं गहतोड़ी ने कहा-अपनों ने ही दिया मुझे धोखा, बताया क्या रहा सबसे ज्यादा पीड़ादायक

मेरे पास बस 137 साल पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का चुनाव निशान था, बस यही मेरी अकेली पूंजी थी। सब कुछ एकला चलो की तर्ज पर मुझे ही करना था। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की चुनावी सभा की व्यवस्था भी मुझे ही करनी पड़ी। ये तो बस एक बानगी है। चुनाव प्रचार शुरू होने से मतदान निपटने तक कांग्रेस के 90 प्रतिशत वरिष्ठ कार्यकर्ता नदारद थे। इसके लिए सबने कई बहाने बनाए। खुद उन्हें मैदान से हटाने के लिए प्रलोभन दिए गए लेकिन वह मैदान में डटीं रहीं। यह दर्दबयां किया हैं उपचुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी ने जो आठ साल तक जिलाध्यक्ष रहने से लेकर तीन साल तक महिला एवं बाल विकास बोर्ड की अध्यक्ष भी रहीं। कांग्रेस प्रत्याशी ने कहा कि संगठन से लेकर कई वरिष्ठ और जिम्मेदार नेताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। पार्टी के अधिकतर दिग्गज नेता, यहां तक कि फरवरी में हुए आम चुनाव में टिकट के लिए आवेदन करने वाले कई नेता भी कांग्रेस से अलग हो गए थे। हमारे अधिकतर पदाधिकारी-कार्यकर्ता भाजपा की गोद में बैठ गए थे और बचे कार्यकर्ताओं में से भी 90 प्रतिशत तो जनता के बीच आने से भी कतराते रहे। कांग्रेस ने इस चुनाव को गंभीरता से नहीं लड़ा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 02, 2022, 13:47 IST
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